रहने दे मुझे इन अंधेरों में ग़ालिब – Hindi Shayari

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रहने दे मुझे इन अंधेरों में ग़ालिब,
कमबख़्त रौशनी में अपनो के असली चहरे नज़र आ जाते है !!😢

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