वो इश्क़ ही क्या, वो इबादत ही क्या – Urdu Shayari

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वो इश्क़ ही क्या, वो इबादत ही क्या,
जिसमे सर उठाने का होश रहे
इजहार ए इश्क़ का मजा तो तब है,
जब मैं खामोश रहूँ, और तू बैचेन रहे