हर पल नजरे उनको देखना चाहे

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हर पल नजरे उनको देखना चाहे तो आँखों का क्या कसूर,
हर पल खुशबू उनकी आये तो साँसों का क्या कसूर,
वैसे तो सपने पूछकर नहीं आते,
पर सपने ही उनके आये तो रातो का क्या कसूर ||
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