कमियाँ तो मुझमें भी बहुत है – Hindi Shayari

179

*कमियाँ तो मुझमें भी बहुत है,*
*पर मैं बेईमान नहीं।*
*मैं सबको अपना मानता हूँ,*
*सोचता फायदा या नुकसान नहीं।*
*एक शौक है ख़ामोशी से जीने का,*
*कोई और मुझमें गुमान नहीं।*
*छोड़ दूँ बुरे वक़्त में दोस्तों का साथ,*
*वैसा तो मैं इंसान नहीं।*

Download Image

 Please wait while your url is generating... 3