जिस राह पर हर बार मुझे कोई अपना छलता रहा – Hindi Shayari

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जिस राह पर हर बार मुझे कोई अपना छलता रहा
फिर भी ना जाने क्यूँ मै उसी राह पर चलता रहा
सोचा बहुत इस बार रोसनी नहीं धुआँ दूंगा
लेकिन चिराग था फितरत से जलता रहा….जलता रहा

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