तू हज़ार बार भी रूठे

तू हज़ार बार भी रूठे | Shayari DIary

तू हज़ार बार भी रूठे
तो मना लूँगा तुझे
मगर देख मोहब्बत में
शामिल कोई दूसरा ना हो ||

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